मकर संक्रांति से मौनी अमावस्या तक संगम तट पर आध्यात्मिक अनुष्ठान की झलक

(14 से 19 जनवरी 2026)

मकर संक्रांति से लेकर मौनी अमावस्या तक, प्रयागराज के पावन संगम तट पर एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस पवित्र अवधि में आश्रम के सदस्यों द्वारा संगम तट पर टेंट लगाकर विविध वैदिक अनुष्ठान, जप, तप और पूजन विधि संपन्न की गई।

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर किया गया यह आयोजन श्रद्धा, साधना और सेवा भाव से परिपूर्ण रहा। प्रतिदिन प्रातःकालीन स्नान, हवन, मंत्रोच्चार और ध्यान सत्रों के साथ वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। आश्रम परिवार के सदस्यों ने मिलकर अनुशासन, संयम और सामूहिक साधना के माध्यम से इस दिव्य समय का सदुपयोग किया।

इस अवसर पर स्वजनों की सहभागिता ने आयोजन को और भी भावपूर्ण बना दिया। संगम की शांति, साधना की गंभीरता और सामूहिक प्रार्थना ने मन को स्थिरता और आत्मिक शांति प्रदान की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नयन की एक प्रेरक यात्रा रहा।

भगवान आप सपरिवार का सर्वविध मंगल करें।
इस पावन आयोजन की यह संक्षिप्त झलक सभी के लिए कल्याण, शांति और सद्भाव का संदेश लेकर आए, यही कामना है।